Ranchi-Varanasi Economic Corridor 2026: क्या है, रूट, लागत, टाइमलाइन और झारखंड के लिए क्यों है गेम-चेंजर?
अगर रांची से वाराणसी का सफर महज साढ़े तीन घंटे में पूरा होने लगे और कोलकाता तक पहुंचने में लगने वाला समय लगभग आधा हो जाए, तो पूर्वी भारत की तस्वीर कितनी बदल सकती है। Ranchi-Varanasi Economic Corridor, जिसे NH-319B ya Varanasi-Ranchi-Kolkata Expressway भी कहा जाता है।
करीब 35,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहा यह एक्सप्रेसवे आने वाले वर्षों में उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।

क्या है रांची-वाराणसी इकोनॉमिक कॉरिडोर?
रांची-वाराणसी इकोनॉमिक कॉरिडोर दरअसल वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह NHAI द्वारा भारतमाला परियोजना के अंतर्गत विकसित किया जा रहा 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसका उद्देश्य पूर्वी भारत के प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को तेज और आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ना है।
यह कॉरिडोर NH-319B के रूप में विकसित किया जा रहा है और झारखंड सहित पूरे पूर्वी भारत के लिए आर्थिक विकास की नई रीढ़ माना जा रहा है।
NH-319B और भारतमाला परियोजना से कनेक्शन
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना का लक्ष्य देशभर में आधुनिक हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार करना है। इसी योजना के तहत NH-319B को विकसित किया जा रहा है।
यह एक्सप्रेसवे वाराणसी, रांची और कोलकाता जैसे बड़े शहरों को जोड़ते हुए एक नया आर्थिक गलियारा तैयार करेगा, जिससे माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों में तेजी आएगी।
Ranchi-Varanasi Economic Corridor Key Facts: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| परियोजना का नाम | वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B) |
| लोकप्रिय नाम | रांची-वाराणसी इकोनॉमिक कॉरिडोर |
| कुल लंबाई | लगभग 610 किमी |
| लेन | 6-लेन (एक्सपैंडेबल) |
| प्रकार | एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे |
| कुल लागत | लगभग ₹35,000 करोड़ |
| निर्माण लागत | लगभग ₹25,000 करोड़ |
| भूमि अधिग्रहण लागत | लगभग ₹10,000 करोड़ |
| एजेंसी | NHAI |
| योजना | भारतमाला परियोजना |
| राज्य | यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल |
| रांची-वाराणसी सेक्शन | लगभग 413 किमी |
| रांची-वाराणसी सेक्शन लागत | लगभग ₹12,800 करोड़ |
| लक्ष्य वर्ष | 2028 |
पूरा रूट और मार्ग विवरण
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के बारहुली क्षेत्र के पास वाराणसी रिंग रोड से शुरू होगा और पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के उलुबेरिया/बागनान क्षेत्र के पास समाप्त होगा।
यह मार्ग पुराने NH-19 (ग्रैंड ट्रंक रोड) के लगभग समानांतर विकसित किया जा रहा है।
प्रमुख शहर और जिले
वाराणसी → चंदौली → भभुआ → सासाराम → औरंगाबाद → गया → चतरा → हजारीबाग → रामगढ़ → रांची → बोकारो → पुरुलिया → बांकुड़ा → कोलकाता
Ranchi-Varanasi Economic Corridor : राज्यवार दूरी
| राज्य | अनुमानित लंबाई |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 22 किमी |
| बिहार | 159–169 किमी |
| झारखंड | 187–196 किमी |
| पश्चिम बंगाल | 242 किमी |

कैमूर टनल होगी खास आकर्षण
इस परियोजना की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक बिहार के कैमूर जिले में प्रस्तावित लगभग 5 किलोमीटर लंबी टनल है।
यह टनल न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएगी बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरणीय प्रभाव को भी कम करने में मदद करेगी।
लागत और टाइमलाइन: 2019 से 2028 तक का सफर
इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई साल लगते हैं। रांची-वाराणसी इकोनॉमिक कॉरिडोर भी कई चरणों में विकसित किया जा रहा है।
Ranchi-Varanasi Economic Corridor : टाइमलाइन

2019
- परियोजना का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार
2021-2023
- DPR, सर्वे और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया
फरवरी 2024
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहले पैकेज का शिलान्यास
2024-2025
- विभिन्न पैकेजों के लिए टेंडर जारी
- निर्माण एजेंसियों की नियुक्ति
2025-2026
- कई हिस्सों में निर्माण कार्य शुरू
जनवरी 2028
- रांची-वाराणसी सेक्शन चालू होने की संभावना
मार्च 2028
- पूरे एक्सप्रेसवे को पूरा करने का लक्ष्य
13 पैकेजों में बंटा प्रोजेक्ट
इतने बड़े कॉरिडोर को 13 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है।
इनमें कई प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
- PNC Infratech
- NKC Projects
- अन्य EPC और HAM मॉडल की एजेंसियां
इस मॉडल से अलग-अलग हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य संभव हो पाया है।
वर्तमान स्थिति (जून 2026)
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभी प्रोजेक्ट कहां तक पहुंचा है?
जून 2026 तक उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार प्रोजेक्ट के कई हिस्सों में तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है।
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उत्तर प्रदेश
चंदौली क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य काफी अच्छी गति से आगे बढ़ रहा है।
बिहार
भभुआ, सासाराम, औरंगाबाद और गया क्षेत्र के कई पैकेजों में निर्माण प्रगति संतोषजनक बताई जा रही है।
झारखंड
झारखंड का हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह रांची, बोकारो और खनिज क्षेत्रों को जोड़ता है।
हालांकि कुछ पैकेजों में अभी भी:
- फॉरेस्ट क्लीयरेंस
- भूमि अधिग्रहण
- पर्यावरणीय मंजूरी
जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।
पश्चिम बंगाल
पुरुलिया और बांकुड़ा क्षेत्र में भी कार्य आगे बढ़ रहा है, हालांकि कुछ हिस्सों में अभी प्रक्रिया जारी है।
झारखंड और पूर्वी भारत को क्या-क्या फायदे होंगे?
यात्रा समय में भारी कमी

इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा यात्रा समय में कमी के रूप में देखने को मिलेगा।
| मार्ग | वर्तमान समय | एक्सप्रेसवे के बाद |
|---|---|---|
| वाराणसी-कोलकाता | 12-14 घंटे | 6-7 घंटे |
| रांची-वाराणसी | 7-8 घंटे | लगभग 3.5 घंटे |
इससे व्यापारिक यात्राएं और व्यक्तिगत सफर दोनों आसान होंगे।
खनिज और स्टील उद्योग को मिलेगा फायदा
झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में से एक है।
यहां से निकलने वाले:
- कोयला
- लौह अयस्क
- स्टील उत्पाद
को कोलकाता और हल्दिया पोर्ट तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा।
बोकारो स्टील प्लांट को भी इसका बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
रोजगार के नए अवसर
निर्माण के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
वहीं भविष्य में:
- लॉजिस्टिक्स पार्क
- वेयरहाउस
- इंडस्ट्रियल हब
- ट्रांसपोर्ट कंपनियां
नए रोजगार अवसर पैदा करेंगी।
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पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद कई प्रमुख पर्यटन स्थल एक-दूसरे से बेहतर तरीके से जुड़ जाएंगे।
जैसे:
- वाराणसी के घाट
- बोधगया
- झारखंड के झरने और हिल स्टेशन
- पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक केंद्र
पर्यटन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
रियल एस्टेट और भूमि मूल्य में बढ़ोतरी
जहां भी बड़े एक्सप्रेसवे बनते हैं, वहां जमीन की कीमतों में तेजी देखी जाती है।
रांची, बोकारो, चतरा और हजारीबाग के आसपास भी भविष्य में रियल एस्टेट गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
चुनौतियां और विवाद
हर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तरह इस परियोजना के सामने भी कुछ चुनौतियां हैं।
फॉरेस्ट क्लीयरेंस
झारखंड के कई हिस्सों में जंगल क्षेत्र होने के कारण वन स्वीकृति प्रक्रिया में समय लग रहा है।
भूमि अधिग्रहण
कुछ गांवों में मुआवजा और जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं।
पर्यावरणीय प्रभाव
ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होने के कारण पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी सवाल उठे हैं।
हालांकि सरकार द्वारा टनल, हरित पट्टी और पर्यावरण संरक्षण उपायों पर काम किया जा रहा है।
निष्कर्ष
दोस्तों, रांची-वाराणसी इकोनॉमिक कॉरिडोर सिर्फ एक एक्सप्रेसवे नहीं, बल्कि पूर्वी भारत के विकास का नया इंजन बनने जा रहा है। करीब 35,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल सकती है।
रांची, बोकारो और झारखंड के खनिज क्षेत्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेज पहुंच मिलेगी। यात्रा समय कम होगा, उद्योगों को नई ताकत मिलेगी और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
अगर निर्माण कार्य तय समय के अनुसार आगे बढ़ता है, तो 2028 तक यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल हो जाएगा और झारखंड के विकास को नई रफ्तार देगा।
